पाक को बड़ा सबक सिखाने की तैयारी, इन विकल्पों पर सरकार कर रही है विचार


 


जम्मू। पुलवामा हमले का बदला लेने की खातिर भारत पाकिस्तान पर हमला बोलेगा परंतु सिर्फ आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों पर। हालांकि वह इस हमले के परिणामों से भली भांति अवगत है जिस कारण वह सीमाओं पर सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने के लिए सेना को तैनात करने लगा हैवैसे पाकिस्तान वारा सीमाओं पर सेना का जमावड़ा करने की पहल की गई हैं क्योंकि वह जानता है कि भारत पुलवामा में हुए हमले का बदला अवश्य लेगा। उच्च पदस्थ रक्षा सूत्रों के मुताबिक, सीमाओं पर फौजों तथा सैनिक साजो सामान की तैयारी हालांकि किसी जंग की खातिर नहीं है बल्कि हमले का बदला लेने के लिए की जाने वाली जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से जिस युद्ध को छेड़े जाने की संभावना है, उसका मुकाबला करने के लिए हैरक्षा सूत्रों के अनुसार, पाक कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवाद के ट्रेनिंग कैम्पों पर हमला करने की खातिर भारतीय सेना ने पूरी तैयारी कर ली हैहालांकि एक सूत्र के अनुसार, ट्रेनिंग कैम्पों पर हमला करने तथा उसके परिणामों से देश को बचाने की खातिर की जाने वाली तैयारियों के लिए भारतीय सेना ने 20 से 30 दिनों का समय मांगा हैं और यह संभावना बढ़ती जा रहीं है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के बाद हमले का आगाज हो सकता है। रक्षाधिकारियों के अनुसार, पाक कब्जे वाले कश्मीर में स्थित ट्रेनिंग कैम्पों पर प्रहार करने की खातिर जो तैयारियां आरंभ की गई हैं उनमें मिसाइलों की तैनाती से लेकर बोफोर्स तोपों की तैनाती भी होगी ही सेना की कई कमांडे यूनिटों को भी इसके लिए तैयार रहने को कहा गया हैजिन्हें उनके यस्क के बारे में पूरी जानकारी दे दी गई है। फिलहाल यह सुनिश्चित नहीं है कि आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों पर हमले के लिए सभी विकल्पों का एक साथ इस्तेमाल होगा या फिर बारी-बारी से उनका प्रयोग किया जाएगा। इन ट्रेनिंग कैम्पों पर हमला कर उन्हें तबाह करने के लिए जो विकल्प सुझाए जा रहे हैं उनमें सबसे प्रमुख जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल तो है ही कमांडे रेड भी शामिल हैहालांकि सेनाधिकारियों का विचार है कि सबसे पहले भारत को बिना एलओसी को लांघे ट्रेनिंग कैम्पों को तबाह करने की कोशिश करनी होगी जिसके लिए मिसाइलों तथा बोफोर्स तोपों का इस्तेमाल ही सबसे बेहतर माना जा रहा हैयही नहीं, मिसाइलों तथा बोफोर्स तोपों के बाद कमांड रेड तथा हवाई हमलों के विकल्प को भी खुला रखा गया है। इन दोनों विकल्पों का इस्तेमाल उसी स्थिति में किया जाएगा जब पहले वाले दो विकल्पों से जो ट्रेनिंग कैम्प बच जाएंगे उन्हें नष्ट करने की खातिर।