खाली बस के साथ हुआ कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का आगाज


दिल्ली हरियाणा बॉर्डर से कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा का आगाज किया। कांग्रेस हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद के प्रयासों से कुलदीप बिश्नोई के अलावा प्रदेश कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने एक बस में सवार होकर पूरे प्रदेश का दौरा करने पर सहमति जता दी। लेकिन कांग्रेसी दिग्गजों के हाव- भाव अभी भी यह बता रहे हैं कि हाईकमान के दबाव में उन्होंने अभी आपस में हाथ मिलाए हैं दिल नहीं ।


23 तारीख की दिल्ली में हुई मीटिंग के बाद आज सुबह भी कांग्रेसी दिग्गजों में एकता के सुर नजर नहीं आए। कार्यक्रम को लेकर कांग्रेसी दिग्गजों में गंभीरता नजर नहीं आई। इसलिए तय समय पर कांग्रेसी दिग्गज गुड़गांव बॉर्डर पर नहीं पहुंचे जिसके चलते खाली बस के साथ परिवर्तन यात्रा का आगाज हुआ।


अधिकांश सारे कांग्रेसी नेता अपनी- अपनी गाड़ियों में बैठकर बादशाहपुर पहुंचे और वहां से बस में सवार हुए। बस के अंदर भी कांग्रेसी नेताओं ने एक दूसरे के प्रति गर्मजोशी नहीं दिखाई।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा दोनों ही एक सीट पर बैठे थे लेकिन दोनों में परस्पर साकारात्मक मेल-जोल नजर नहीं आया। दोनों के चेहरे यह बता रहे थे कि मजबूरी में दोनों को एक सीट पर बैठना पड़ रहा है। दोनों ने आपस में बहुत कम बातचीत की जिससे यह जाहिर हो गया की बिगड़े संबंधों में अभी तक सुधार नहीं हुआ है और दोनों में दूरियां अभी बाकी है।


बाकी नेताओं ने भी मीडिया को दिए बयानों के अलावा आपस में यात्रा की कामयाबी के लिए कोई जज्बा नहीं दिखाया।


कुलदीप बिश्नोई ने यात्रा में भागीदारी नहीं की जिससे यह साबित हो गया कि वह हाईकमान द्वारा किए गए वायदे को पूरा किए जाने तक पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखेंगे।


पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा की अगुवाई में हो रही यात्रा में उनके अलावा सिर्फ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर के समर्थकों कि गर्मजोशी ही नजर आई।


हुड्डा समर्थक यह दिखाने का प्रयास कर रहे थे कि उनके नेता की अगुवाई में यह यात्रा हो रही है और अब हुड्डा के हाथों में ही कांग्रेस की कमान है।


दूसरी तरफ तंवर समर्थक भी अपने नेता के समर्थन में गर्मजोशी से नारे लगा रहे थे और यह दिखा रहे थे कि उनके नेता की इस यात्रा में अहम भागीदारी है। आज की यात्रा में लगभग 200 किलोमीटर का सफर यह संकेत कर गया कि यह यात्रा लोगों में कांग्रेसी नेताओं में एकता का संदेश देने के लिए निकाली गई है।


प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के हाव भाव मैं वह गर्मजोशी नजर नहीं आई जो हाईकमान उम्मीद करता है आपसी दूरियों के बीच निकाली जा रही यह परिवर्तन यात्रा तब तक कामयाब नहीं होगी जब तक सभी कांग्रेसी नेता आपसे गतिरोध को छोड़कर पार्टी की मजबूती के लिए मिलकर प्रयास नहीं करेंगे।


बात यह है कि कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखकर निकाली गई है। इस यात्रा के जरिए कांग्रेस हाईकमान जहां पर प्रदेश के नेताओं में एकता कायम करना चाहता है, वही जनता में यह संदेश देना चाहता है कि भाजपा को पराजित करने के लिए उसके सभी नेता एक होकर काम करने जा रहे हैं।


अगर प्रदेश कांग्रेस के सभी नेताओं ने आपसी मतभेदों को छोड़कर यात्रा की सफलता के लिए पुरजोर ताकत लगाई और यात्रा के दौरान एक दूसरे के साथ सकारात्मक संबंधों का प्रदर्शन किया तो यात्रा अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल भी हो सकती है लेकिन यात्रा का पहला दिन यह साफ-साफ बता गया कि अभी कांग्रेसी नेताओं ने आपसी मतभेदों को दूर करने के लिए कोई मन नहीं बनाया है और उनकी आपसी फूट कारण यात्रा का कोई फायदा नहीं होगा।


कांग्रेस हाईकमान ने दबाव डालकर कांग्रेसी नेताओं को एक बस में तो बैठा दिया है लेकिन उनके बीच एकता की मिठास पैदा हुए बगैर यह यात्रा बेमानी रहेगी और भाजपा के लिए परेशानी खड़ी नहीं कर पाएगी।


अब यह देखना यह है कि अगले 5 दिनों में कांग्रेस की यह परिवर्तन यात्रा क्या खुद कांग्रेस के नेताओं के हावभाव और संबंधों में परिवर्तन लाने में सफल हो पाती है या नहीं।


अगर कांग्रेस के नेता एकजुटता के सूत्र में बंध गए तो भाजपा के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर पाएंगे और अगर इसी तरह एकता का दिखावा करते रहे तो कांग्रेस को कोई सियासी फायदा नहीं होगा। कांग्रेसी नेताओं को यह समझना होगा कि वक्त की नजाकत को समझते हुए उन्हें आपसी मुद्दों को छोड़कर एक होकर भाजपा का सामना करना पड़ेगा अगर भी एकजुटता के साथ आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा का सामना करेंगे तो पार्टी के अलावा उन्हें खुद के क्षेत्रों में भी फायदा होगा और अगर इसी तरह बंटे रहे तो 2014 की तरह कांग्रेस एक बार फिर भाजपा के हाथों करारी शिकस्त झेलने को मजबूर होगी।


 

 

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