यूपी में विधानसभा उप−चुनाव से दूरी बना सकती है कांग्रेस

लखनऊ। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में 2022 में होने विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी संभालेंगी। लोकसभा चुनाव प्रचार के समय राहुल गांधी ने संकेत दिया था कि प्रियंका को विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर सक्रिय किया गया है।



पार्टी सूत्रों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कुछ कांग्रेस नेताओं ने कांग्रेस आलाककामन को सलाह दी है कि वह अगले कुछ माह में होने वाले विधानसभा उप−चुनावों से दूरी बनाकर रखें। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हाल ही में लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने अगर यूपी इकाई के नेताओं की सलाह मान ली, तो वह कुछ माह के भीतर यूपी में होने वाले 11 विधानसभा सीटों के उप−चुनाव में नजर नहीं आएगी।



कांग्रेस ने सबसे पहले संगठन को मजबूत बनाने का खाका तैयार किया है। उसे प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर द्वारा इस्तीफे की पेशकश करने के बाद नए अध्यक्ष के बारे में भी निर्णय लेना है। पार्टी सूत्रों के अनुसार पार्टी संगठन के ढांचे में बदलाव करते हुए राज्य को चार जोनों में विभाजित करके चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति बनाएगी।



बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी पिछले कुछ वर्षो से किसी भी तरह के उप−चुनावों से दूरी बनाकर चलती रही है। इसी लिए पिछले वर्ष कैराना, फूलपुर और गोरखपुर में हुए उप−चुनाव में उसने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। बल्कि एक जगह रालोद और दो सीटों पर सपा प्रत्याशी को समर्थन दिया था।


तीनों सीटों पर जीत के बाद ही यूपी में बसपा−सपा और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन का रास्ता साफ हुआ था। कांग्रेस की राज्य इकाई के आधा दर्जन पूर्व विधायकों व प्रदेश पदाधिकारियों ने पार्टी हाईकमान को उप−चुनाव नहीं लड़ने वाला अनुरोध पत्र लिखकर सलाह दी है कि कमजोर संगठन के रहते बार-बार फजीहत कराना उचित नहीं है। उप−चुनाव में बिना पूरी तैयारी के कूदना पार्टी हित में नहीं होगा।


पार्टी को पूरी ताकत से मिशन−2022 को कामयाब बनाने में अभी से जुट जाना चाहिए।
ब्लाक, जिला और प्रदेश स्तर पर जरूरी बदलाव करने के साथ पुख्ता रणनीति तैयार की जाए। जिस पर अमल करने के साथ पदाधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए। पत्र में कहा गया कि वर्ष 2017 की मात के बाद से उप−चुनावों को लेकर कांग्रेस के अनुभव अच्छे नहीं रहे है।


गोरखपुर व फूलपुर जैसी संसदीय सीटों पर हुए उप−चुनाव में कांग्रेस बेहद खराब स्थित मिल रही। इसके चलते कैराना के उप−चुनाव में कांग्रेस ने सपा, बसपा और रालोद गठबंधन को समर्थन करना ही उचित समझा था।