हर साल आठ लाख लोग खत्म कर लेते हैं जीवनलीला

-आत्महत्या करने वालों में नौजवानों की संख्या सबसे अधिक 
नई दिल्ली। जीवन कुदरत का दिया सबसे खूबसूरत तोहफा है, इसके बावजूद कुछ छोटी-छोटी बातों में इसे खत्म करने से नहीं हिचकते।


विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में हर साल करीब आठ लाख लोग विभिन्न वजहों से खुदकुशी करके अपनी जान दे देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करके अपनी जान गवां देता है। हर साल मौत को गले लगाने वाले लाखों लोग की मौत की अलग-अलग वजहें हैं। आत्महत्या केवल एक व्यक्ति को होने वाले नुकसान तक ही नहीं है, सुसाइड की वजह से एक परिवार, एक समुदाय और देश प्रभावित होता है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में बताया गया है कि सन 2016 में खुदकुशी करने वाले ज्यादातर लोगों की उम्र 15 से 29 साल के बीच रही है।
आपको जानकार हैरानी होगी कि खुदकुशी करने वाले ज्यादातर लोग अल्प एंड मध्यम आय वाले देशों से संबंध रखते हैं। यानी जिन देशों में लोगों की प्रतिव्यक्ति आय बहुत ही कम है, वहां खुदकुशी के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। खुदकुशी करने वाले इस वर्ग के लोगों की संख्या 79 प्रतिशत है। यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि खुदकुशी करने वाले लोगों की संख्या दुनिया में युद्ध और नरसंहार में मारे गए लोगों से भी ज्यादा है। खुदकुशी करने वाले लोग मौत को गले लगाने के लिए अलग-अलग रास्ते तलाशते हैं। ज्यादातर मामलों में सुसाइड के तीन तरीके देखने को मिलते हैं। सुसाइड करने के लिए ज्यादातर लोग जहरीले पदार्थ, फांसी या बंदूक का इस्तेमाल करते हैं। 



पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सुसाइड के मामले दक्षिण-पूर्व एशिया से सामने आते हैं। यहां करीब 12 प्रतिशत से ज्यादा लोगों की मौत सुसाइड की वजह से होती है। यूरोप में भी सुसाइड के मामले कुछ कम नहीं है, लेकिन यहां सुसाइड करने वाले पुरुषों की संख्या बाकी देशों मुकाबले काफी अधिक है।


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