सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाया जा रहा ईमानदारी का पाठ

चंडीगढ़। चंडीगढ़ के एक सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को ईमानदारी का पढ़ा पढ़ाया जा रहा है।


गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकंडरी स्कूल, धनास में स्कूल प्रशासन ने एक ऐसी दुकान खोली है, जिसमें न तो कोई दुकानदार बैठाया गया है और न ही दुकान में कोई सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है। दुकान में विद्यार्थियों की जरूरतों का सामान बिकता है और विद्यार्थी सामान की कीमत के अनुसार दुकान के गुल्लक में पैसे रखकर सामान उठा ले जाते हैं।


इस सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या तीन हजार से भी अधिक है। इस प्रयोग का मकसद विद्यार्थियों को ईमानदारी सिखाना है। स्कूल की प्रिंसिपल सीमा रानी ने बताया कि विद्यार्थियों को ईमानदारी सिखाने के मकसद से यह आइडिया दिमाग में आया था। उन्होंने बताया कि पिछले करीब दो महीने से स्कूल में यह दुकान सफलता से चल रही है यानि कोई भी ऐसा मामला नहीं है जब किसी विद्यार्थी ने दुकान से सामान उठाकर उसकी कीमत के पैसे दुकान में न रखें हो।  उन्होंने बताया कई बार ऐसा हुआ है कि अगर किसी विद्यार्थी के पास पैसे नहीं हैं और सामान का जरूरत है,तब वह दुकान से सामान ले लेता है और अगले दिन घर से पैसे लाकर गुल्लक में डाल देता है।  



विद्यार्थियों को भी ईमानदारी का ये पाठ पढ़ने का तरीका काफी पसंद आया। विद्यार्थियों का कहना है कि क्योंकि उन्हें यहांसे ,सामान बाजार की तुलना में सस्ता मिलता है,इसकारण वे भी यहां से सामान खरीदते हैं। ईमानदारी की इस दुकान पर पढ़ाया जा रहा ईमानदारी का पाठ बच्चों के व्यवहार में भी उतर रहा है।


इसकी गवाही स्कूल में कैंटीन चलने वाले संजय कुमार दे रहे हैं। कैंटीन के मालिक संजय कुमार ने बताया कि कई बार वहां किसी काम से कैंटीन खुली छोड़कर बाहर भी चले जाते हैं,तब बच्चे कैंटीन में आकर सामान लेकर उसकी कीमत उनके कांउटर पर रख देते हैं। चंडीगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र धनास में स्थित इस सरकारी स्कूल में ज्यादा संख्या में आर्थिक तोर पर कमजोर घरों के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या तीन हजार से अधिक है, जो अपने आप में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की बेहद अच्छी संख्या है।


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